जामिया हिंसा व सीएए के विरोध के सिलसिले में गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। शरजील ने तय समय में जांच पूरी न होने का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी। अदालत ने उसके खिलाफ चल रही जांच अवधि को 25 अप्रैल को 90 दिनों के लिए बढ़ा दिया था। जांच अवधि को बढ़ाए जाने को शरजील ने चुनौती दी थी।
दिल्ली पुलिस ने शरजील को 28 जनवरी को बिहार से गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने कुछ दिन पहले उस पर अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) लगाया था। अदालत ने यूएपीए के तहत ही जांच अवधि बढ़ाई थी। वह फिलहाल असम की जेल में है क्योंकि उसके खिलाफ वहां भी मुकदमा दर्ज किया गया था।
पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार राणा ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि जांच अवधि बढ़ाए जाने का आदेश गलत नहीं था क्योंकि यह जांच अवधि खत्म होने से पहले जारी किया गया था। शरजील के खिलाफ जांच की अवधि 27 अप्रैल को खत्म होनी थी। अब चूंकि यूएपीए के तहत जांच अवधि बढ़ाई जा चुकी है तो ऐसे हालात में याची को जमानत प्रदान नहीं की जा सकती।
अदालत ने पुलिस की उस दलील को मानते हुए जांच अवधि बढ़ा दी थी कि कोरोना के कारण जांच तेजी से नहीं हो पाई है। पुलिस ने शुरुआती जांच में शरजील पर देशद्रोह व भड़काऊ भाषण देने की धाराएं लगाई थीं। जामिया इलाके में प्रदर्शन के दौरान उसने अपने भाषण में कहा था कि पूरे देश में चक्का जाम कर असम को पूरे देश से अलग कर देना चाहिए। -एजेंसी